पश्चिमी चम्पारणबिहार

कृषि कानून के खिलाफ माले ने किया घंटों चक्का जाम।

मैनाटांड़(प.च)। 

किसानो से वार्ता का दिखावा बंद करो, किसान विरोधी तीनों काला कृषि कानून वापस लो, बिजली बिल 2020 वापस लो,धान खरीद की गारंटी करो, और दिल्ली में किसानों पर दमन बंद करो नारा के साथ किसान आंदोलन के साथ एकजुटता जाहिर करते हुए भाकपा माले, किसान महासभा और अखिल भारतीय खेत ग्रामीण मजदूर सभा के कार्यकर्ताओं ने मैनाटांड़ बेतिया मुख्य मार्ग में थाना चौक के पास घंटों जाम किया।जाम से बेतिया मैनाटाड़ मुख्य पथ पर वाहनों की लंबी लाइन लग गयी। मौके पर माले नेता अच्छेलाल राम ने कहा कि मोदी सरकार किसानों के प्रति संवेदनहीन बनी हुई है। अंबानी अडानी जैसे पूंजिपतियों के लिए किसानों को गुलामी की तीन कृषि कानून लाई है।अगर वह लागू होता है तो किसान कंपनियों के गुलाम बन अपने ही खेतों में मजदूरी करने को बाध्य होंगे। चंपारण में नील की खेती करने वाली इस्ट इंडिया कंपनी के राज में किसान गुलाम बन गये थे। ठीक उसी तरह नया कृषि कानून भी कंपनी राज में बदल जाएगा। ऐसे में किसानों का आंदोलन जायज़ है। उनके समर्थन में पूरे देश में भाकपा-माले चक्का जाम कर मोदी सरकार को बताना चाहती है कि जितना जल्दी हो किसानों से बात कर तीनों काला कानून वापस ले।आगामी आठ दिसंबर को भारत बंद करने की भी आवाज बुलंद की गयी‌।घंटों जाम के बाद बीडीओ राजकिशोर प्रसाद शर्मा,सीओ कुमार राजीव रंजन एवं थानाध्यक्ष धनंजय कुमार ने जाम करने वालों से वार्ता कर जाम खत्म कराया। मौके पर माले नेता सीताराम राम, बंधु राम, इन्द्र देव कुशवाहा, अजय राम, भोला पासवान, राजभवन राम, मदन साह, काशी मांझी श्याम कुमार राम ,रोहित दास आदि मौजूद रहे।