पश्चिमी चम्पारणबिहार

धनधान्य परिपूर्णता के साथ सामाजिक सौहार्द बढ़ाने का महापर्व है दिपावली:गरिमा

,बेतिया(प.च)।

मारवाड़ी समाज में परम्परागत विधि व्यवहार के साथ दिपावली त्योहार मनाया गया। इस मौके पर नप सभापति गरिमा देवी सिकारिया ने कहा कि दीपावली धनधान्य से परिपूर्णता के साथ सामाजिक सौहार्द बढ़ाने का महापर्व है। दीपावली को प्रकाशपर्व या रोशनी का त्यौहार भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार, त्रेतायुग में जब रावण का वध कर भगवान श्रीराम अयोध्या लौट रहे थे तो अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। ऐसे में भगवान श्रीराम के उसी स्वागत को याद करके इस दिन को हम हर साल इसे भव्य त्यौहार के रूप में मनाते हैं। वहीं, दिवाली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। इस दिन लोग अपने घर की अच्छी तरह से सफाई करते हैं और अपने अपने घरों के मुख्य द्वार पर रंगोली भी बनाते हैं। साथ ही पूरे घर को घी व तेल से जल रहे दीपों से सजाया जाता है। सभापति ने कहा कि इस विधि का वैज्ञानिक महत्व है। इस वैज्ञानिक उपचार से बरसातभर में और ऋतु परिवर्तन के साथ पैदा हुये विषैले व मनुष्य के लिये नुकसान दायक कीड़े मकोड़े दीपकों के लपट में जल कर मर जाते हैं। उन्होंने बताया कि मान्यता है कि दीपावली की रात ही मां लक्ष्मी का आगमन होता है और वे विचरण करतीं हैं। मान्यता है कि जो घर सबसे अधिक साफ और सजा संवरा दिखता है, माता लक्ष्मी मंगलकर्ता भगवान गणेश के साथ वहीं वास करतीं हैं। इस दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा के बाद प्रसाद बांटे जाने की परंपरा है। सभापति श्रीमती सिकारिया ने कहा कि इन सबके साथ अपने गहनों, पैसों और बहीखातों की भी पूजा करने की भी परंपरा है। उन्होंने कहा कि दीपावली की एक परम्परागत विशेषता यह भी है कि इसके आयोजन में सभी को अपने पास पड़ोस के जरूरतमंद की हर सम्भव मदद की जाती है। जो सामाजिक भाईचारा और सौहार्द को बढ़ाता है।